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Raj Mishra

जादूगर दादी बहुत खुशनसीब होते हैं वे बच्चे जिन्हें बचपन में दादा-दादी और नाना-नानी का प्यार मिलता है। मैं भी खुद को उन खुशकिस्मत लोगों में गिनता हूँ, जिन्हें एक नहीं बल्कि दो-दो दादियों का स्नेह मिला। एक दादी वे थीं जिन्हें मैं बचपन से जानता था, और दूसरी वे, जो हमेशा किसी सुरक्षा कवच […]

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Manish Mishra

ममता की वह छांवश्रीमती यशोदा मिश्रा (दीदी) की स्मृतियों में गांव की गलियों में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो केवल एक व्यक्ति नहीं होते, बल्कि पूरे गांव की आत्मा बन जाते हैं। उनका होना हर किसी को सुरक्षा, अपनापन और स्नेह का एहसास कराता है। मेरे जीवन में भी ऐसी ही एक महान शख्सियत

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Amit Sharma

आपकी श्रद्धांजलि को कहानी के रूप में अधिक भावनात्मक और प्रवाहपूर्ण शैली में इस प्रकार लिखा जा सकता है: मैं अमित शर्मा हूँ। आज जब मैं स्वर्गीय श्रीमती यशोदा बाई मिश्रा जी, हमारी प्रिय “दुलहरा वाली दादी”, को याद करता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे स्मृतियों का एक विशाल संसार मेरे सामने जीवंत हो

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Vivek Soni

दुलहरा वाली दीदी मैं विवेक हूं।संयमी, सीमित और छोटे दायरे में रहने वाला इंसान।मेरा बचपन भी कुछ ऐसा ही था—एक छोटी सी बस्ती, जहां मुश्किल से दस-पंद्रह घर थे और उन्हीं लोगों के बीच मेरा पूरा संसार सिमटा हुआ था। करीब बारह-तेरह वर्षों तक मेरी दुनिया बस उसी बस्ती तक सीमित रही। फिर धीरे-धीरे उम्र

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Raj Mishra

Raj Mishra स्वर्गीय श्रीमती यशोदा मिश्रा (दीदी) एक नेकदिल, मेहनती और दयालु व्यक्तित्व की धनी थीं। वे हमेशा दूसरों की सहायता करने के लिए तत्पर रहती थीं और समाज के हर व्यक्ति के प्रति उनके मन में प्रेम, सम्मान और संवेदनशीलता थी।उन्होंने अपने जीवन में सेवा, सहयोग और मानवता के जिन मूल्यों को अपनाया, वही

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Rishi Mishra

मेरी दीदी — मेरी दादी, मेरी दुनिया यशोदा मिश्रा (My LadyDon 💪🏻) मैं ऋषि, आज अपने जीवन के उस सबसे अहम हिस्से को फिर से जी रहा हूँ, जिसे मैं कभी भूल नहीं सकता।उस हिस्से का नाम है — मेरी दादी, मेरी “दीदी”, श्रीमती यशोदा मिश्रा। आज वो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी

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